Keywords : गाय, किसान, ग्रामीण, जीवन, धार्मिक, आर्थिक, निर्धनता, दान इत्यादि।
Abstract : मुंशी प्रेमचंद हिन्दी साहित्य के यथार्थवादी और जनसरोकार से जुड़े महान कथाकार हैं। उनका कालजयी उपन्यास ‘गोदान’ भारतीय ग्रामीण जीवन की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थितियों का सजीव चित्रण दर्शाता है। गोदान का अर्थ ही है – "गाय का दान" जो भारतीय समाज में धार्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। गाय भारतीय समाज में मातृत्व, समृद्धि और धर्म की प्रतीक मानी जाती है। गाँव के किसान के लिए गाय केवल एक पशु नहीं, बल्कि आजीविका का साधन, परिवार का हिस्सा और धार्मिक आस्था का केन्द्र है। उपन्यास के अंत में जब होरी मृत्युशय्या पर होता है, तो उसकी पत्नी धनिया एक रुपए में गाय दान करने की रस्म निभाती है। यह दृश्य दर्शाता है कि यथार्थ में भले ही किसान गाय न पाल सका, पर उसकी आत्मा को शांति केवल गोदान से ही मिलती है।
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