Keywords : नैतिकता, महापाप, राजनीति, विवेक, ज्ञान, शिक्षा, मानवता, धर्म।
Abstract : महात्मा गांधी बहुमुखी प्रतिभा से युक्त एक महान विचारक थे। उन्होंने मनुष्य के जीवन को स्पर्श करते हर एक क्षेत्र को अपने चिंतन का केंद्र बनाया। उनकी यह झलक उनके द्वारा सूचित सात सामाजिक पापों की अवधारणा में स्पष्ट दिखाई देती है। उनकी यह अवधारणा राजनीति, समाज, धर्म, नैतिकता, विज्ञान एवं तकनीकी, वाणिज्य, शिक्षा आदि सभी महत्वपूर्ण बिंदुओं को स्पर्श करती है। वर्तमान में हम देखते ही पाते है की राजनीति में बड़े-बड़े घोटाले, भ्रष्टाचार की बातें बढ़ रही है और मानवीय नैतिक सिद्धांतों का हनन हो रहा है। समाज में कितने ही ऐसे लोग हैं जो बिना श्रम किए बड़े-बड़े घोटाले करके धोखेधड़ी से धन एकत्र कर रहे हैं। कई लोग बिना विवेक सुख उपभोग के लिए अंधी दौड़ में लगे हुए है जिससे समाज में कई जघन्य अपराध में बढ़ोतरी हुई है। शिक्षा को कई चरित्रहीन लोगों ने अंगत स्वार्थसिद्धि के लिए साधन के रूप में प्रयोग करके समाज और राष्ट्र में एक खतरा पैदा कर दिया। कितने ही ऐसे व्यापारी है जो सामान्य जनता के कल्याण, स्वास्थ्य आदि के बारे में बिना सोचे केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करने हेतु, कहीं गुना मुनाफा कमाने की लालच से चीज वस्तुएं, सेवाओं की गुणवत्ता कम करके समाज को आर्थिक असंतुलन की तरफ बढ़ा रहे हैं।
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KANISHK CHAVDA EDUCATION & CHARITABLE TRUST