Keywords : ऑनलाइन शिक्षा, पारंपरिक कक्षा, तुलनात्मक अध्ययन, प्रायोगिक शोध, सीखने की प्रभावशीलता, मिश्रित शिक्षण
Abstract : 21वीं सदी में तकनीकी विकास ने शिक्षा प्रणाली को एक नए आयाम पर पहुंचा दिया है। पारंपरिक शिक्षण, जो वर्षों से शिक्षा का आधार रहा है, अब डिजिटल तकनीक के युग में ऑनलाइन शिक्षा से प्रतिस्पर्धा कर रहा है। कोविड-19 महामारी ने इस परिवर्तन को और तीव्र बना दिया, जिसके कारण शिक्षण-शिक्षण की प्रक्रिया में ऑनलाइन माध्यम एक प्रमुख विकल्प बन गया। इस शोध का उद्देश्य ऑनलाइन शिक्षा और पारंपरिक कक्षा शिक्षण की प्रभावशीलता, विद्यार्थियों की सहभागिता, सीखने की गुणवत्ता और संतुष्टि का तुलनात्मक अध्ययन करना है। प्रायोगिक पद्धति के अंतर्गत 100 विद्यार्थियों पर अध्ययन किया गया—50 विद्यार्थियों को पारंपरिक कक्षा में और 50 विद्यार्थियों को ऑनलाइन माध्यम से समान विषय पर शिक्षण दिया गया। दोनों समूहों को प्री-टेस्ट और पोस्ट-टेस्ट के माध्यम से मूल्यांकन किया गया। सांख्यिकीय विश्लेषण (t-test) से प्राप्त परिणामों के अनुसार पारंपरिक कक्षा शिक्षण में विद्यार्थियों का प्रदर्शन औसतन बेहतर रहा, जबकि ऑनलाइन माध्यम में अधिक लचीलापन और स्व-शिक्षण क्षमता पाई गई। यह शोध यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि दोनों ही शिक्षण पद्धतियों के अपने-अपने लाभ और सीमाएँ हैं। भविष्य के लिए ‘मिश्रित शिक्षण पद्धति’ (Blended Learning) को अपनाना सबसे प्रभावी विकल्प हो सकता है।
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